यूडीआईडी कार्ड एवं दिव्यांगता प्रमाण पत्र की सत्यता के प्रभिप्रमाणन तथा लाभ वितरण से पूर्व अनिवार्य सत्यापन किये जाने के संबंध में राज्य शासन द्वारा निर्देश जारी
धारा 89 फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर योजनाओं का लाभ लेने पर प्रथम उल्लंघन पर
10 हजार रूपये तक का दंड तथा पुनरावृत्ति पर 50 हजार से 5 लाख रूपये तक का दंड
धारा 91 फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर लाभ प्राप्त करने वाले को 2 वर्ष तक का कारावास या एक लाख रूपये तक जुर्माना या दोनो से दंडित किया जा सकेगा
यह प्रक्रिया दिव्यांगजनों के हितों की रक्षा तथा लाभ वितरण की
शुचिता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी
यूडीआईडी कार्ड एवं दिव्यांगता प्रमाण पत्र की सत्यता के प्रभिप्रमाणन तथा लाभ वितरण से पूर्व अनिवार्य सत्यापन किये जाने के संबंध में राज्य शासन द्वारा निर्देश जारी किये गये हैं। भारत सरकार के संज्ञान में विभिन्न राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों से नकली, फर्जी, गलत प्रतिशत के दिव्यांग प्रमाण पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड जारी होने की शिकायतें प्राप्त होने पर भारत सरकार ने कठोर दण्डात्मक प्रावधान स्पष्ट रूप से दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में निर्दिष्ट किये हैं।
उपसंचालक सामाजिक न्याय ने बताया जारी निर्देशों में कहा गया है धारा 89 फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर योजनाओं का लाभ लेने पर प्रथम उल्लंघन पर 10 हजार रूपये तक का दंड तथा पुनरावृत्ति पर 50 हजार से 5 लाख रूपये तक का दंड, धारा 91 फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर लाभ प्राप्त करने वाले को 2 वर्ष तक का कारावास या एक लाख रूपये तक जुर्माना या दोनो से दंडित किया जा सकेगा।
जिले में लाभ प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत सभी यूडीआईडी कार्ड तथा दिव्यांगता प्रमाण पत्र का लाभ प्रदाय से पूर्व सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाये, इसके अंतर्गत प्रत्येक आवेदनकर्त्ता के यूडीआईडी कार्ड एवं दिव्यांगता प्रमाण पत्र की यूडीआईडी पोर्टल के माध्यम से डिजिटल अभिप्रमाणन किया जाये, यदि किसी के पास पुराना मैनुअल प्रमाण पत्र हो, तो उसे यूडीआईडी पोर्टल पर डिजिटाइज करवाना अनिवार्य किया जाये। किसी भी शासकीय नियुक्ति, शिक्षण संस्थान में प्रवेश, छात्रवृत्ति, पेंशन, साधन सहायता, परिवहन सुविधा इत्यादि लाभ देने से पूर्व प्रमाण पत्र की वैधता सुनिश्चित की जाये। यदि आवश्यक हो तो अभिप्रमाणन हेतु प्रमाण पत्र जारी करने वाली चिकित्सा संस्था, मेडिकल बोर्ड से सत्यापन करवाया जाये। संदेहास्पद प्रमाण पत्रों एवं मामलों की सूचना जिले के एससीपीडी/सीसीपीडी कार्यालय को तत्काल प्रेषित की जाये।
भारत सरकार द्वारा 15 अक्टूबर 2025 को जारी एसओपी के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सीय परीक्षण करवाये जा सकते हैं। यदि किसी दिव्यांग आवेदक को निर्णय के विरूद्ध आपत्ति हो तो अपील तंत्र उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। इस हेतु तत्काल प्रभाव से कार्यवाही सुनिश्चित की जाये। इस संबंध में जिला स्थित सभी विभागों, तहसीलों, पेंशन कार्यालय, शैक्षणिक संस्थानों, रोजगार कार्यालय, परिवहन विभाग एवं अन्य लाभ प्रदाता संस्थाओं को लिखित निर्देश जारी किये जायें। दिव्यांगजनों की सत्यापन प्रक्रिया के अभिलेख सुरक्षित रखे जायें, प्रत्येक सत्यापित एवं संदिग्ध मामलों की अंकित रिपोर्ट एससीपीडी/सीसीपीडी को भेजी जाये। यह प्रक्रिया दिव्यांगजनों के हितों की रक्षा तथा लाभ वितरण की शुचिता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।
